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NeelAarogyam.com ब्लॉग को शुरू करने के पीछे मूल मकसद समाज में आयुर्वेद के बारे सही और सटीक जानकारी देना है। आज भी समाज आयुर्वेद की चमत्कारी शक्तियों के ज्ञान बहुत ही सीमित है। प्रारंभ से भारत में आयुर्वेद की शिक्षा मौखिक रूप से गुरु-शिष्य परंपरा के अंतर्गत ऋषियों  द्वारा दी जाती रही है। लगभग 5000 साल पहले आयुर्वेदिक ज्ञान को ग्रंथों में दर्ज किया गया।

आयुर्वेद का शाब्दिक अर्थ “जीवन का विज्ञान” है। यह स्वास्थ्य की एक ऐसी समुचित प्रकिया है जिसका प्राचीन कालो से पालन किया जा रहा है। आयुर्वेद के अनुसार, केवल बीमारियों या रोगों से मुक्ति ही स्वास्थ्य नहीं है, बल्कि यह शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक की बीच संतुलन बिठाना भी जरूरी है।

आयुर्वेद इस पद्धति पर काम करना है की उपचार का मार्ग शरीर और मस्तिष्क में संतुलन स्थापित करता है। इस प्रकार, आयुर्वेदिक उपचार में बीमारियों को रोकने के लिए व्यक्ति की जीवन शैली और खानपान की आदतों को बदलने पर ध्यान केंद्रित किया जाता है, साथ ही साथ दोषों में संतुलन बहाल करने के लिए शमन चिकित्सा (शांति या दर्दनाशक उपचार) और शोधन चिकित्सा (शुद्धि उपचार) भी काम किया जाता है।