Thyroid in Hindi, थायरॉइड: कारण, लक्षण और इलाज

Thyroid in Hindi;थायरॉइड: कारण लक्षण और इलाज; थायराइड क्या है?; थायराइड का आयुर्वेदिक उपचार; थायराइड का घरेलू उपचार; थायराइड में आहार।

थायराइड ग्रंथि होती है जो हमारे गले में पाई जाती है यह तितली के आकार की होती है और यह सांस नली के ऊपर होती है। थायराइड ग्रंथि में होने वाली गड़बड़ी के कारण होने वाले रोग को थायराइड रोग कहते हैं। थायराइड ग्रंथि हमारे शरीर में मेटाबॉलिज्म को रेगुलेट करती है। आयुर्वेद से जुड़ी समस्या किसी भी उम्र में हो सकती है। महिला, पुरुष, बच्चे, बूढ़े कोई भी इसका शिकार हो सकता है। विशेषकर महिलाओं में यह ज्यादा होता है।

थायराइड ग्रंथि Tri -iodothyronin(T3) और Thyroxin(T4) नामक हार्मोन स्रावित करती है।ये हार्मोन हमारे शरीर के तापमान ,ह्रदय गति, रक्तचाप, चयापचय और शरीर के अन्य हार्मोन की प्रक्रिया को विनियमित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। जबकि इसके असंतुलित होने पर आपको बहुत सारी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।

थायराइड(Thyroid) का बढ़ना आजकल महिलाओं में एक आम समस्या हो गई है। हमारी बिजी लाइफ स्टाइल और खानपान ने इस समस्या को और भी आम बना दिया है। इसके बाद भी बहुत सारी महिलाओं को थायराइड बढ़ने का पता तब तक पता नहीं चलता है जब तक कि लक्षण गंभीर नहीं हो जाते हैं।

थायराइड(Thyroid) रोग के प्रकार-

थायराइड ग्रंथि से होने वाले विकार दो प्रकार के होते हैं-

1 -थायराइड ग्रंथि की अति सक्रियता(Hyperthyroidism)

2 -थायराइड ग्रंथि की अल्प सक्रियता(Hypothyroidism)

1-थायराइड ग्रंथि की अति सक्रियता(Hyperthyroidism)-

हाइपरथाइरॉयडिज़्म में थायराइड ग्रंथि से निकलने वाले हार्मोन T3और T4 आवश्यकता से अधिक निकलते हैं और शरीर के ऊर्जा का उपयोग अधिक मात्रा में करने लगते है। इस स्थिति को अति सक्रिय थायराइड के रूप में भी जाना जाता है और इससे अनेक प्रकार की स्वास्थ्य जटिलताएं हो सकती है।

थायराइड ग्रंथि की अति सक्रियता के लक्षण-

थायराइड ग्रंथि की अति सक्रियता के कारण शरीर में मेटाबॉलिज्म बढ़ जाता है। जिसके कारण निम्नलिखित लक्षण देखने को मिलते हैं-

  • चिंता और घबराहट या धड़कनों का बढ़ना
  • चिड़चिड़ापन
  • वजन कम होना तब भी जब आप अपना भोजन बढ़ा दिए हो या भूख मैं कोई कमी ना हो
  • भूख में वृद्धि
  • नींद कम आना
  • त्वचा और बालों का पतला होना
  • गर्मी के प्रति संवेदनशीलता
  • हड्डियों और मांसपेशियों में कमजोरी
  • अनियमित मासिक धर्म
  • थायराइड ग्रंथि या गंडमाला होना

2 -थायराइड ग्रंथि की अल्प सक्रियता(Hypothyroidism)-

हाइपोथाइरॉएडिज्म तब होता है जब आपके शरीर में थायराइड ग्रंथि पर्याप्त थायराइड हार्मोन नहीं बनाता और छोड़ता है। इससे शरीर का मेटाबॉलिज्म धीमा हो जाता है।

थायराइड ग्रंथि की अल्प सक्रियता के लक्षण-

थायराइड ग्रंथि के अल्प सक्रियता को हाइपोथाइरॉएडिज्म या अंडरएक्टिव थायराइड ग्लैंड भी बोलते हैं। यह तब होता है जब आपकी थायराइड ग्रंथि पर्याप्त मात्रा में हार्मोन नहीं बना पाती है। इस के निम्नलिखित लक्षण है-

  • थकान महसूस होना
  • हाथों में सुन्नता और झुंझुनी का अनुभव करना
  • वजन का बढ़ना
  • कब्ज होना
  • बार-बार और भारी मासिक धर्म होना
  • त्वचाऔर बालों का रूखा और खुरदुरा होना
  • आवाज का बदल जाना या कर्कश हो जाना

थायराइड रोग का कारण(causes of thyroid disease)

थायराइड रोग के निम्नलिखित कारण हो सकते हैं-

  • भोजन में आयोडीन की मात्रा कम या ज्यादा होने से थायराइड ग्रंथि पर विशेष रूप से प्रभाव पड़ता है
  • अधिक तनाव या चिंता होने से
  • अव्यवस्थित लाइफस्टाइल
  • यह रोग वंशानुगत भी हो सकता है। यदि परिवार के दूसरे सदस्य को समस्या रही हो तो बच्चों में भी हो सकता है
  • मधुमेह
  • आहार में सोया उत्पादों का अधिक इस्तेमाल
  • महिलाओं में गर्भावस्था के दौरान कभी-कभी थायराइड हार्मोन में असंतुलन हो जाता है।

थायराइड(Thyroid) होने के अन्य कारण-

अन्य रोगों के कारण भी थायराइड की बीमारी हो सकती है जैसे-

  • गंडमाला रोग
  • थायराइड ग्रंथि में सूजन
  • हाशिमोटो रोग
  • विटामिन B12 की कमी
  • ग्रेव्स रोग
  • आयोडीन की कमी

थायराइड रोग का परीक्षण(Diagnosis of Thyroid Disease)

थायराइड रोग के लक्षण कभी-कभी अन्य बीमारियों के लक्षण जैसे होते हैं जिससे लोग आसानी से भ्रमित हो जाते हैं और थायराइड का निदान मुश्किल हो जाता है। ऐसे में कुछ परीक्षण ऐसे हैं जो यह निर्धारित करने में मदद करते हैं कि आपको थायराइड है या नहीं। जैसे-

  • रक्त परीक्षण या ब्लड टेस्ट करके T3और T4 के स्तर की पुष्टि
  • थायराइड ग्रंथि का अल्ट्रासाउंड
  • शारीरिक परीक्षण

थायराइड रोग में खान -पान(Diet in Thyroid Disease)

थायराइड की बीमारी में आपका भोजन बहुत महत्वपूर्ण है। उचित खानपान से आप इसे बढ़ने से रोक सकते हैं। इसमें आपको निम्नलिखित बातों का ध्यान रखना चाहिए-

  • भोजन में मोटे अनाज को शामिल करें
  • ज्यादा से ज्यादा फलों और सब्जियों को भोजन में शामिल करें
  • कम वसा वाले आहार लें
  • सेंधा नमक का प्रयोग करें
  • चीनी के अधिक सेवन से बचें
  • विटामिन ए वाली चीजों का सेवन करें
  • नियमित रूप से दूध का सेवन करें
  • लघु और सुपाच्य भोजन करें
  • नट्स जैसे बादाम ,काजू और खरबूज ,सूरजमुखी के बीज का अधिक सेवन करें

थायराइड(Thyroid) में क्या ना करें-

  • बहुत ज्यादा ठंडेऔर खुश्क पदार्थों का सेवन नहीं करें
  • मिर्च मसालेदार तैलीयऔर खट्टे पदार्थों के प्रयोग नहीं करें
  • बासी खाद्य पदार्थ का सेवन नहीं करें
  • इसमें कच्ची सब्जियां विशेष रुप से पालक, बंद गोभी, फूल गोभी, ब्रोकली, मूली ,मक्का ,सोया, कैफीन और रिफाइंड ऑयल का प्रयोग नहीं करना चाहिए
  • अधिक शारीरिक परिश्रम से बचें
  • धूम्रपान और अल्कोहल से बचें
  • जंक फूड और प्रिजर्वेटिव युक्त आहार ना करें

थायराइड(Thyroid) में जीवन शैली-

  • ऐसे रोगियों को सुबह की धूप 10 से 15 मिनट जरूर लेनी चाहिए
  • तनाव मुक्त जीवन जीने की कोशिश करें
  • नियमित रूप से प्राणायाम और ध्यान करें
  • योगासन करें। इसके लिए आप निम्न योगासन कर सकते हैं
  • सूर्य नमस्कार
  • सर्वांगासन
  • भुजंगासन
  • उष्ट्रासन
  • हलासन
  • पवनमुक्तासन

थायराइड(Thyroid) का आयुर्वेदिक उपचार-

1 -निदान परिवर्जन

निदान परिवर्तन अर्थात जो रोग का कारण है उसको दूर किया जाता है इससे रोग को बढ़ने से रोका जा सकता है। रुक्ष खाद्य पदार्थ, वात बढ़ाने वाले आहार ,कम मात्रा में भोजन ,कटु और तिक्त का सेवन नहीं करना चाहिए।

2 -वमन –

इस चिकित्सा से गले में जकड़न और गले की सूजन में राहत मिलती है। इसलिए थायराइड से ग्रस्त व्यक्ति में वमन चिकित्सा लाभकारी है

3 -विरेचन –

अत्यधिक पित्त की स्थिति में, और बढे हुए कफ को हटाने में विरेचन मददगार है क्योंकि इसमें शरीर में जमा बलगम, पितरस और फैट से छुटकारा मिलता है। इस वजह से हाइपो थायराइड के कारण उत्पन्न हुई वजन से संबंधित समस्याओं को नियंत्रित करने में पूरे विरेचन उपयोगी है।

4 -स्वेदन –

स्वेदन से शरीर पर पसीना लाकर आम दोष को बाहर निकाला जाता है। हाइपो थायराइड के इलाज के लिए स्वेदन के साथ उद्वर्तन (पावडर से मालिश ) सहित पाचन और दीपन(भूख को बढ़ने वाली ) जड़ी बूटियों की सलाह दी जाती है।

5 -रसायन

रसायन चिकित्सा से उपचार में मदद मिलती हैं और रोगी की आयु बढ़ती है। इसमें अश्वगंधा, शतावरी, तुलसी जैसी उर्जा दायक औषधियों का इस्तेमाल किया जाता है। रसायन चिकित्सा का प्रयोग विशेष रुप से थाइरोइड हार्मोन कम होने की स्थिति में किया जाता है।

6 -औषधि

  • कांचनार गुग्गुलु-यह थायराइड की सूजन को कम करने में उपयोगी है।
  • मुलेठी-मुलेठी का सेवन करें थायराइड कैंसर सेल्स को बढ़ने से रोकता है।
  • अश्वगंधा-यह शरीर के हार्मोन स्तर को नियंत्रित करती है। एक चम्मचअश्वगंधा पाउडर को एक गिलास दूध में रात को सेवन करें
  • निर्गुंडी-यह परिसंचरण तंत्र और प्रजनन प्रणाली पर कार्य करते हैं।यह दर्द निवारक होता है। सूजन को कम करता है। निर्गुंडी को शहद पानी या काढ़े के साथ ले सकते हैं
  • वचा -इसमें उर्जा दायक, उत्तेजक, नसों को आराम देने वाले और कफ को निकालने वाले गुण होते हैं। यह दर्द को कम करती है
  • दशमूल क्वाथ
  • वरुणादि क्वाथ
  • चित्रकादि वटी
  • गोमूत्र हरीतकी
  • तुलसी -तुलसी का सेवन बहुत ही फायदेमंद है। एक चम्मच तुलसी के रस में आधा चम्मच एलोवेरा मिलाकर प्रयोग करें
  • त्रिफला चूर्ण-रोजाना एक चम्मच त्रिफला चूर्ण का सेवन फायदेमंद है

घरेलू उपचार-

हल्दी-रात में सोने से पहले एक गिलास दूध में आधा चम्मच हल्दी डालकर पीने से फायदा मिलता है

लौकी का जूस– सुबह खाली पेट लौकी का जूस पीने से आराम मिलता है

अलसी का चूर्ण-प्रतिदिन एक चम्मच अलसी का चूर्ण लेने से थायराइड में आराम पहुंचता है।

दालचीनी का सेवन से थायराइड में लाभ मिलता है।

नियमित रूप से थोड़ी मात्रा में काली मिर्च का सेवन करें।

Disclaimer-

कोई भी दवा बिना चिकित्सक की सलाह के लेना हानिकारक हो सकता है। इसलिए कुछ भी प्रयोग करने से पहले चिकित्सक की सलाह अवश्य लें।

यदि आपको यह जानकारी पसंद आती है तो आप अपना सुझाव कमेंट बॉक्स में जरूर दें। और इससे संबंधित यदि कुछ भी जानना चाहते हैं तो आप कमेंट बॉक्स में पूछ सकते हैं। आपके हर एक कमेंट का जवाब जरूर दिया जाएगा। धन्यवाद ….।

और भी पढ़ें –

1 -Healthy Weight loss Tips, वजन कम करने के प्रभावी तरीके

2 –Immunity With Ayurveda,इम्युनिटी बढ़ाने के आयुर्वेदिक उपाय

3 –Cold And Cough Ayurvedic Remedies, सर्दी और खांसी का आयुर्वेदिक उपचार

Leave a Comment